Vasudev Vinayaka Chaturthi 2026: Date, Shubh Yogas, Puja Vidhi & Significance
Key Takeaway
When is Vasudev Vinayaka Chaturthi in 2026?
Vasudev Chaturthi (also known as Chaitra Vinayaka Chaturthi) will be strictly observed on Sunday, 22 March 2026 based on the Udaya Tithi principle.
• Auspicious Yogas: The day is highly blessed with Ravi Yoga (active till 10:42 PM) and Bhadrawas Yoga (from 10:36 AM to 09:16 PM).
• Significance: Fasting and worshipping Lord Ganesha on this day removes all obstacles (Vighna) and grants knowledge, prosperity, and mental peace.
• Key Offerings: Durva grass, Modak, Laddoos, Shami leaves, and Sindoor are mandatory for the Puja.
हिंदू धर्म में वासुदेव चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इसे चैत्र विनायक चतुर्थी और मनोरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
🗓️ चैत्र वासुदेव विनायक चतुर्थी कब है?
दृक पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि का विवरण:
चतुर्थी तिथि आरंभ: 21 मार्च 2026, रात 11:56 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त: 22 मार्च 2026, रात 09:16 बजे(सनातन परंपरा में उदया तिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए वासुदेव चतुर्थी का व्रत 22 मार्च 2026 को रखा जाएगा।)
🌟 महान शुभ योग
इस वर्ष वासुदेव चतुर्थी पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इन योगों में भगवान गणेश की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है:
☀️ रवि योग: रात 10:42 बजे तक प्रभावी रहेगा। 🛡️ भद्रावास योग: सुबह 10:36 बजे से रात 09:16 बजे तक।वासुदेव चतुर्थी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को रखने और गणेश जी की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सभी कार्यों में सफलता मिलती है। यह व्रत ज्ञान, समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। साथ ही इस दिन दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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सर्वप्रथम प्रातःकाल स्नानोपरान्त शुद्ध वस्त्र धारण कर संकल्प लें।
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तदुपरान्त पूजन स्थल पर लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणपति की मूर्ति स्थापित करें।
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दूर्वा, लड्डू, मोदक, सिन्दूर, शमीपत्र तथा सुपारी अर्पित करते हुये भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें।
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तत्पश्चात् गणपति अथर्वशीर्ष, ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र, सङ्कटनाशन गणेश स्तोत्र आदि का पाठ कर भगवान गणेश को प्रसन्न करें। व्रत की सफलता हेतु वासुदेव चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण अथवा पाठ करें।
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मुद्गलपुराण के अनुसार पञ्चमी तिथि को ब्राह्मण के समक्ष विधिवत् व्रत का पारण करें।
AstroAnanta Team