Sheetala Saptami 2026: Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi & Basoda Tradition
Key Takeaway
When is Sheetala Saptami in 2026 and how is it celebrated?
Sheetala Saptami will be celebrated on Tuesday, 10 March 2026.
• Significance: Goddess Sheetala is worshipped to protect the family from skin diseases, infections, and heat-related illnesses.
• Ritual (Basoda): Devotees offer and consume cold, stale food prepared the previous night. Many households abstain from lighting the stove on this day.
• Shubh Yogas: The day is blessed with Harshan Yoga (till 08:21 AM) and Ravi Yoga, making prayers highly auspicious.
• Puja Time: The auspicious window for Puja is all day from 06:24 AM to 06:26 PM.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी मां शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में होने वाली त्वचा और संक्रमण (Infections) से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए उनकी पूजा की जाती है। इस दिन भक्त मां शीतला से अपने परिवार के उत्तम स्वास्थ्य, आरोग्यता और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।
⏰ पूजा का शुभ मुहूर्त
सप्तमी तिथि प्रारंभ: 9 मार्च, रात 11:27 बजे सप्तमी तिथि समाप्त: 11 मार्च, रात 01:54 बजे 06:24 AM - 06:26 PM (पंचांग के अनुसार पूजा के लिए पूरा दिन शुभ है)ज्योतिष गणनाओं के अनुसार इस बार शीतला सप्तमी के दिन 'हर्षण योग' (सुबह 08:21 बजे तक) और 'रवि योग' का अद्भुत संयोग बन रहा है। इन शुभ योगों में देवी शीतला की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है।
🍲 'बसोड़ा' क्या है और इसका क्या महत्व है?
शीतला माता को 'ठंडक' प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इसी कारण कई स्थानों पर (विशेषकर उत्तर भारत में) इसे बसोड़ा (Basoda) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता। लोग एक दिन पहले (षष्ठी को) बना हुआ ठंडा और बासी भोजन (Stale Food) ही देवी को अर्पित करते हैं और पूरे परिवार के साथ उसी प्रसाद को ग्रहण करते हैं।
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स्नान और संकल्प: सप्तमी के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करें और साफ, स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत/पूजा का संकल्प लें।
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पूजन सामग्री: एक थाली में हल्दी, रोली (कुमकुम), अक्षत (चावल), सुहाग का सामान, फूल, और जल का कलश तैयार करें।
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अर्पण: माता शीतला की प्रतिमा या चित्र के समक्ष हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाएं। उन्हें जल और विशेष रूप से नीम की पत्तियां (Neem Leaves) अर्पित करें।
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ठंडे भोजन का भोग: माता को एक दिन पूर्व बनाए गए ठंडे मीठे चावल, पुए, और हलवे का भोग लगाएं। माता शीतला की कथा सुनें और अंत में आरती करें।
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प्रसाद वितरण: पूजा संपन्न होने के बाद उसी ठंडे भोजन को परिवार के सभी सदस्यों के साथ प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।
AstroAnanta Team