Meen Sankranti & Kharmas: Why Auspicious Works Stop for a Month?
Key Takeaway
What is Meen Sankranti and Kharmas?
Meen Sankranti occurs when the Sun enters the Pisces (Meen) zodiac sign. This transition marks the beginning of a one-month period known as Kharmas (or Malmas).
• Astrological Impact: The Sun's energy weakens in Jupiter's sign (Pisces), making it highly inauspicious for worldly events.
• Prohibited Activities: Marriages, housewarmings (Griha Pravesh), Mundan, and starting new businesses are strictly banned.
• What to do: It is a highly sacred month for worshipping Lord Vishnu, performing charity (Daan), taking holy baths, and chanting mantras.
हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष में सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन को 'संक्रांति' कहा जाता है। हर संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन मीन संक्रांति (Meen Sankranti) को अत्यंत विशेष माना जाता है। इसी समय से एक ऐसा काल शुरू होता है जिसे 'खरमास' या 'मलमास' कहते हैं, जिसमें लगभग एक महीने तक विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है।
ज्योतिषीय कारण (Astrological Impact)
सूर्य को ऊर्जा, तेज, आत्मा और मांगलिक कार्यों का प्रमुख कारक माना जाता है। लेकिन जब सूर्य देव बृहस्पति (गुरु) की राशि मीन (Pisces) या धनु (Sagittarius) में प्रवेश करते हैं, तो उनकी गति और प्रभाव धीमा पड़ जाता है। सूर्य की ऊर्जा कम प्रभावी होने के कारण इसे खरमास कहा जाता है (यह साल में दो बार आता है)।
कब खत्म होगा यह समय?
मीन संक्रांति से शुरू होने वाला यह खरमास लगभग एक महीने तक चलता है। जब सूर्य देव मीन राशि की यात्रा पूरी करके अपनी उच्च राशि मेष (Aries) में प्रवेश करते हैं (मेष संक्रांति), तब यह अशुभ अवधि स्वतः समाप्त हो जाती है और सभी शुभ कार्य पुनः प्रारंभ हो जाते हैं।
मीन संक्रांति और खरमास को लेकर एक अत्यंत रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है। सूर्य देव ब्रह्मांड को प्रकाशित करने के लिए अपने सात घोड़ों के रथ पर लगातार यात्रा करते हैं।
लगातार बिना रुके दौड़ने के कारण जब उनके घोड़े थक कर प्यासे हो गए, तो सूर्य देव ने एक तालाब के पास रथ रोका। परंतु सृष्टि का नियम है कि सूर्य का रथ रुक नहीं सकता। तब घोड़ों को विश्राम देने के लिए सूर्य देव ने तालाब के पास खड़े गधों (जिन्हें संस्कृत में 'खर' कहा जाता है) को अपने रथ में जोत लिया।
चूंकि गधों की गति घोड़ों की तुलना में बहुत धीमी होती है, इसलिए इस एक महीने के दौरान सूर्य की चाल मंद (धीमी) हो जाती है और उनका तेज घट जाता है। इसी कारण इस अवधि को 'खरमास' कहा जाता है। एक महीने बाद सूर्य देव वापस अपने घोड़ों को रथ में जोड़ लेते हैं।
⛔ खरमास में वर्जित कार्य (Don'ts)
- विवाह संस्कार: शादी-विवाह तय करना या फेरे लेना।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या नींव रखना।
- नया व्यापार: किसी नए व्यवसाय का उद्घाटन।
- अन्य संस्कार: मुंडन, जनेऊ या सगाई जैसे बड़े मांगलिक कार्य।
✅ दान-पुण्य का विशेष महत्व (Do's)
- भगवान विष्णु की पूजा: यह समय श्री हरि की आराधना के लिए सर्वोत्तम है।
- यज्ञ और दान: इस अवधि में किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना अधिक मिलता है।
- तीर्थ स्नान: पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत फलदायी है।
- मंत्र जाप: आध्यात्मिक उन्नति के लिए व्रत व ध्यान करें।
💍 ज्योतिष शास्त्र: विवाह के लिए शुभ स्थितियां
खरमास समाप्त होने के पश्चात जब विवाह शुरू होते हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मीन लग्न को विवाह के लिए अति शुभ माना जाता है।
नक्षत्रों की बात करें तो— अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, मघा, चित्रा, स्वाति, हस्त, अनुराधा और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र विवाह संस्कार के लिए सबसे अनुकूल और श्रेष्ठ माने गए हैं।
AstroAnanta Team